2019 के लोकसभा चुनाव में अभी काफी समय है, लेकिन नेताओं और पार्टियों ने अपनी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया. बिहार में सीटों के बंटवारे को लेकर नाराज चल रहे राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने आज मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है. सोमवार दोपहर को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. बताया जा रहा है कि कुशवाहा महागठबंधन में शामिल हो सकते हैं.
उपेंद्र कुशवाहा ने केंद्र की मोदी सरकार पर करारा हमला करते हुए कहा कि बिहार से केंद्र की सरकार ने कई वादे किए थे लेकिन पूरे नहीं किए गए.
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा- 2014 में पीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर नरेंद्र मोदी ने पिछड़े तबकों के विकास का वादा किया था, बिहार के लिए स्पेशल पैकेज की घोषणा की थी. नरेंद्र मोदी पीएम बने और मैं भी मंत्री बना. जो उम्मीद थी उस पर नरेंद्र मोदी पीएम के तौर पर खरे नहीं उतरे. बिहार के लिए कुछ नहीं किया गया. सामाजिक न्याय के एजेंडे से हटकर RSS के एजेंडे को लागू किया जा रहा है. पिछले 15 साल के नीतीश सरकार भी फिसड्डी साबित हुई है.
मंगलवार से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है, उससे पहले आज एनडीए की बैठक होनी है. इस बैठक में उपेंद्र कुशवाहा ने जाने से मना कर दिया था.
नीतीश से 36 का आंकड़ा, लोकसभा सीटों पर नजर!
आपको बता दें कि उपेंद्र कुशवाहा के बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से संबंध अच्छे नहीं हैं. वह लगातार नीतीश कुमार और बीजेपी के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं.
दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा की मांग है कि 2019 के लोकसभा में उन्हें बिहार में चार सीटें दी जाएं. लेकिन बीजेपी उन्हें दो ही सीटें देने पर अड़ी है, यही कारण है कि वह लगातार इसका विरोध कर रहे हैं.
सूत्रों की मानें तो बिहार की 40 में से 17 सीटों पर बीजेपी और 17 सीटों पर जेडीयू चुनाव लड़ सकती है. जबकि बाकी सीटें LJP और RLSP में बांटी जाएंगी.
गौरतलब है कि मंगलवार को पांच राज्यों के चुनावी नतीजे आने हैं, एग्जिट पोल में कांग्रेस को बढ़त मिलती दिख रही है. ऐसे में विपक्ष हमलावर है, एग्जिट पोल में बीजेपी की संभावित हार उनके साथियों को भी आवाज बुलंद करने की हिम्मत दे रही है.
Monday, December 10, 2018
Wednesday, December 5, 2018
याहू की लिस्ट में मोदी लगातार दूसरे साल टॉप न्यूजमेकर, राहुल गांधी का दूसरा नंबर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार दूसरे साल याहू पर सबसे बड़े न्यूजमेकर रहे। दूसरा नंबर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का है। ट्रिपल तलाक पर फैसला देने वाले पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा तीसरे नंबर पर रहे। मंगलवार को जारी याहू ईयर इन रिव्यू लिस्ट 2018 में यह सामने आया।
मीटू के आरोप में फंसे एमजे अकबर का छठा नंबर
याहू की ईयर इन रिव्यू लिस्ट में भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या का चौथा नंबर है। पीएनबी घोटाले का आरोपी नीरव मोदी पांचवें नंबर पर रहा। यौन उत्पीड़न के आरोपी पूर्व विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर लिस्ट में छठे नंबर पर रहे। इन आरोपों की वजह से ही उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
रणवीर-दीपिका बने कपल न्यूजमेकर
कपल न्यूज मेकर्स में रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण ने जगह बनाई। अंडर-2 ईयर कैटेगरी में सैफ अली खान के बेटे तैमूर ने लिस्ट में जगह बनाई। मलयाली फिल्मों की एक्ट्रेस प्रिया प्रकाश वॉरियर भी लिस्ट में शामिल हुईं हैं। याहू का कहना है कि फिल्म ऑरू आदार लव में प्रिया का आंख मटकाने का स्टाइल इंटरनेट पर काफी चर्चा में रहा।
टॉप-3 फेक न्यूज
क्या मोदी ने वास्तव में ओवैसी के पैर छुए। इस खबर के साथ फोटो शॉप की हुई तस्वीर वायरल हुई थी।
मोदी ने 15 लाख रुपए महीने पर निजी मेकअप आर्टिस्ट को रखा। इस खबर के साथ मोदी की वह तस्वीर वायरल हुई जिसमें मैडम तुसाद म्यूजियम की ओर से उनकी नाप ली गई थी।
तीसरे नंबर पर राहुल गांधी की तस्वीर रही, जिसमें वो स्टेज पर एक महिला का हाथ पकड़े हुए नजर आए।
याहू के मुताबिक इस साल कर्नाटक इलेक्शन टॉपिक सबसे ज्यादा सर्च किया गया। आधार के सॉफ्टवेयर की पड़ताल से जुड़ा विषय सर्च में दूसरे नंबर पर रहा।
फाइनेंस न्यूजमेकर कैटेगरी में आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल टॉप पर रहे। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी का दूसरा नंबर रहा। इस कैटेगरी की लिस्ट में अनिल अंबानी का नाम भी शामिल है।
फीमेल सेलेब्रिटी में सनी लियोनी टॉप पर
मेल सेलेब्रिटी में इंटरनेट पर सबसे ज्यादा सलमान खान सर्च किए गए। अमेरिकी सिंगर और प्रियंका चोपड़ा के पति निक जोनस दूसरे नंबर पर हे। फीमेल सेलेब्रिटी में में सनी लियोनी टॉप पर रहीं।
इंटरनेट यूजर की पसंद, वायरल स्टोरी-टॉपिक, न्यूजमेकर और ऑनलाइन ट्रेंड के आधार पर याहू ईयर इन रिव्यू लिस्ट तैयार करता है। इसमें यूजर की सर्च हैबिट्स, उनके रीडिंग सेलेक्शन और शेयरिंग की आदतों का ध्यान रखा जाता है।
मीटू के आरोप में फंसे एमजे अकबर का छठा नंबर
याहू की ईयर इन रिव्यू लिस्ट में भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या का चौथा नंबर है। पीएनबी घोटाले का आरोपी नीरव मोदी पांचवें नंबर पर रहा। यौन उत्पीड़न के आरोपी पूर्व विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर लिस्ट में छठे नंबर पर रहे। इन आरोपों की वजह से ही उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
रणवीर-दीपिका बने कपल न्यूजमेकर
कपल न्यूज मेकर्स में रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण ने जगह बनाई। अंडर-2 ईयर कैटेगरी में सैफ अली खान के बेटे तैमूर ने लिस्ट में जगह बनाई। मलयाली फिल्मों की एक्ट्रेस प्रिया प्रकाश वॉरियर भी लिस्ट में शामिल हुईं हैं। याहू का कहना है कि फिल्म ऑरू आदार लव में प्रिया का आंख मटकाने का स्टाइल इंटरनेट पर काफी चर्चा में रहा।
टॉप-3 फेक न्यूज
क्या मोदी ने वास्तव में ओवैसी के पैर छुए। इस खबर के साथ फोटो शॉप की हुई तस्वीर वायरल हुई थी।
मोदी ने 15 लाख रुपए महीने पर निजी मेकअप आर्टिस्ट को रखा। इस खबर के साथ मोदी की वह तस्वीर वायरल हुई जिसमें मैडम तुसाद म्यूजियम की ओर से उनकी नाप ली गई थी।
तीसरे नंबर पर राहुल गांधी की तस्वीर रही, जिसमें वो स्टेज पर एक महिला का हाथ पकड़े हुए नजर आए।
याहू के मुताबिक इस साल कर्नाटक इलेक्शन टॉपिक सबसे ज्यादा सर्च किया गया। आधार के सॉफ्टवेयर की पड़ताल से जुड़ा विषय सर्च में दूसरे नंबर पर रहा।
फाइनेंस न्यूजमेकर कैटेगरी में आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल टॉप पर रहे। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी का दूसरा नंबर रहा। इस कैटेगरी की लिस्ट में अनिल अंबानी का नाम भी शामिल है।
फीमेल सेलेब्रिटी में सनी लियोनी टॉप पर
मेल सेलेब्रिटी में इंटरनेट पर सबसे ज्यादा सलमान खान सर्च किए गए। अमेरिकी सिंगर और प्रियंका चोपड़ा के पति निक जोनस दूसरे नंबर पर हे। फीमेल सेलेब्रिटी में में सनी लियोनी टॉप पर रहीं।
इंटरनेट यूजर की पसंद, वायरल स्टोरी-टॉपिक, न्यूजमेकर और ऑनलाइन ट्रेंड के आधार पर याहू ईयर इन रिव्यू लिस्ट तैयार करता है। इसमें यूजर की सर्च हैबिट्स, उनके रीडिंग सेलेक्शन और शेयरिंग की आदतों का ध्यान रखा जाता है।
Monday, November 19, 2018
मोदी के खिलाफ याचिका में तीस्ता का नाम शामिल होने का एसआईटी ने किया विरोध
2002 के गुजरात दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) से क्लीन चिट मिलने के खिलाफ दायर जाकिया जाफरी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 26 नवंबर को सुनवाई करेगा। जस्टिस एएम खानविलकर की बेंच ने कहा कि इस मामले पर सुनवाई के लिए थोड़ा और वक्त चाहिए।
एसआईटी के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा- ये याचिका विचार योग्य नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को इस मामले में दूसरी याचिकाकर्ता नहीं बनाया जा सकता है। इस पर बेंच ने कहा- आपकी बात पर हम इस मामले की सुनवाई से पहले विचार करेंगे।
साबरमती ट्रेन के कोच में आगजनी के बाद भड़के थे दंगे
27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती ट्रेन के कोच में आग लगा दी गई थी। इसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी। मारे गए ज्यादातर लोग अयोध्या से लौट रहे कारसेवक थे। इस घटना के बाद गुजरात में दंगे भड़क गए थे। इनमें करीब 1000 लोगों की जान चली गई थी।
गुलबर्ग सोसायटी में 69 लोगों की हत्या हुई
गोधराकांड के अगले दिन 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में दंगाइयों ने कांग्रेस सांसद जाफरी समेत 69 लोगों की हत्या कर दी थी। घटना के बाद सोसायटी से 39 लोगों के शव मिले थे। बाकी 30 लोगों के शव नहीं मिलने पर 7 साल बाद उन्हें मृत मान लिया गया था। गुलबर्ग सोसायटी में 28 बंगले और 10 अपार्टमेंट हैं। गुजरात दंगों से जो इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे, गुलबर्ग सोसायटी उनमें से एक थी। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी ने गुलबर्ग सोसायटी केस की दोबारा जांच की थी। एसआइटी ने इस मामले में 66 लोगों को गिरफ्तार किया था।
दंगों के वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री थे मोदी
जकिया जाफरी का आरोप है कि दंगा भड़कने के दौरान उनके पति वरिष्ठ नेताओं और पुलिस अफसरों को फोन करते रहे, लेकिन गुलबर्ग साेसायटी तक मदद नहीं पहुंची और दंगाइयों को रोका नहीं जा सका। दंगों के वक्त मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। एसआईटी ने 8 फरवरी 2012 को क्लोजर रिपोर्ट दायर की। इसमें नरेंद्र मोदी और अन्य अफसरों को क्लीन चिट दी गई। इसके खिलाफ जकिया जाफरी की याचिका को दिसंबर 2013 में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट और 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने ठुकरा दिया था।
एसआईटी के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा- ये याचिका विचार योग्य नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को इस मामले में दूसरी याचिकाकर्ता नहीं बनाया जा सकता है। इस पर बेंच ने कहा- आपकी बात पर हम इस मामले की सुनवाई से पहले विचार करेंगे।
साबरमती ट्रेन के कोच में आगजनी के बाद भड़के थे दंगे
27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती ट्रेन के कोच में आग लगा दी गई थी। इसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी। मारे गए ज्यादातर लोग अयोध्या से लौट रहे कारसेवक थे। इस घटना के बाद गुजरात में दंगे भड़क गए थे। इनमें करीब 1000 लोगों की जान चली गई थी।
गुलबर्ग सोसायटी में 69 लोगों की हत्या हुई
गोधराकांड के अगले दिन 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में दंगाइयों ने कांग्रेस सांसद जाफरी समेत 69 लोगों की हत्या कर दी थी। घटना के बाद सोसायटी से 39 लोगों के शव मिले थे। बाकी 30 लोगों के शव नहीं मिलने पर 7 साल बाद उन्हें मृत मान लिया गया था। गुलबर्ग सोसायटी में 28 बंगले और 10 अपार्टमेंट हैं। गुजरात दंगों से जो इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे, गुलबर्ग सोसायटी उनमें से एक थी। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी ने गुलबर्ग सोसायटी केस की दोबारा जांच की थी। एसआइटी ने इस मामले में 66 लोगों को गिरफ्तार किया था।
दंगों के वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री थे मोदी
जकिया जाफरी का आरोप है कि दंगा भड़कने के दौरान उनके पति वरिष्ठ नेताओं और पुलिस अफसरों को फोन करते रहे, लेकिन गुलबर्ग साेसायटी तक मदद नहीं पहुंची और दंगाइयों को रोका नहीं जा सका। दंगों के वक्त मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। एसआईटी ने 8 फरवरी 2012 को क्लोजर रिपोर्ट दायर की। इसमें नरेंद्र मोदी और अन्य अफसरों को क्लीन चिट दी गई। इसके खिलाफ जकिया जाफरी की याचिका को दिसंबर 2013 में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट और 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने ठुकरा दिया था।
Thursday, November 1, 2018
क्या नेपाल के पास है घरेलू हिंसा का समाधान?
एक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भारी भीड़ है. इसी भीड़ में डॉक्टर प्रभात रिजाल को एक मरीज़ दिखी जिसके बदन पर छिलने और खरोंच के निशान थे.
उस महिला के आने की उम्मीद डॉक्टर प्रभात को पहले से थी. हम जिस अस्पताल का ज़िक्र कर रहे हैं, वो नेपाल के पश्चिमी इलाक़े में स्थित घोराही क़स्बे का क्षेत्रीय अस्पताल है.
डॉक्टर प्रभात और उनके साथी डॉक्टरों का साबक़ा हर रात ऐसे मरीज़ों से पड़ता है.
आम तौर पर ऐसे चोटिल मरीज़ शाम ढलने के बाद आते हैं. होता ये है कि इस वक़्त कई शराबी मर्द काम से लौटते हैं और शराब पीना शुरू करते हैं.
फिर वो अपनी बीवियों से मार-पीट करते हैं.
पतियों की हिंसा की शिकार महिलाएं अक्सर अपना पेट दबाए हुए आती हैं. कई बार उन्हें कान में दर्द की भी शिकायत होती है.
लेकिन अस्पताल के डॉक्टर और नर्सें पहले इन महिलाओं के बदन पर चोट और खरोंच के निशान देखते हैं. इन्हीं से असल बात पता चलती है.
घरेलू हिंसा की शिकार महिलाएं
उस महिला को देखते ही डॉक्टर प्रभात रिजाल को लगा कि कुछ गड़बड़ है. उन्होंने महिला से पूछा कि क्या हुआ है? महिला अपने पति की पिटाई से बचने के लिए भागकर अस्पताल आई थी. वो अभी भी हांफ रही थी. उसके बाल पसीने से भीगे हुए थे.
रात के वक़्त अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड काफ़ी व्यस्त रहता है, तो डॉक्टर रिजाल एक नर्स के साथ उस महिला को एक प्राइवेट कमरे में ले गए. उन्होंने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया.
इसके बाद उन्होंने महिला से बात कर के पूरा मामला समझा. उसे समझाया कि पति का मार-पीट करना सामान्य बात नहीं है. उसे ये हरकतें बर्दाश्त करने की ज़रूरत नहीं है.
कुछ देर बाद नर्स उसे पास ही स्थित एकद्वार संकट व्यवस्थापन केंद्र ले गई. ये वो जगह है जहां पर ऐसी घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं की मदद का पूरा इंतज़ाम है.
इन केंद्रों पर एक महिला पुलिस अधिकारी होती है और कुछ सलाहकार होते हैं. जो महिला को मानसिक तनाव और आर्थिक चुनौतियों से उबरने में मदद करते हैं.
पति, लिव-इन पार्टनर या ब्वॉयफ्रैंड के हाथों हिंसा की शिकार होने वाली महिलाओं को सेहत से जुड़ी कई मुश्किलें झेलनी पड़ी हैं. इसकी शुरुआत डॉक्टर के पास जाने से होती है.
कई बार यहां डॉक्टर वो परेशानियां न सिर्फ़ देख पाते हैं बल्कि उनसे निपटने में मदद भी करते हैं, जिनकी शिकार ये महिलाएं होती हैं.
बहुत से देशों में सरकारें अस्पतालों में ऐसी सुविधाएं देने से कतराते हैं. लेकिन, नेपाल ने घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं की मदद के लिए अस्पतालों में ही ऐसे केंद्र बनाए हैं, जो घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं की मदद करते हैं.
इन केंद्रों में ज़्यादातर महिलाओं को ही नियुक्त किया जाता है. जो इन महिलाओं की हर तरह से मदद करते हैं.
कितनी ख़तरनाक है घरेलू हिंसा
यूं तो कोई भी साथी के हाथों हिंसा का शिकार हो सकता है. पर, महिलाएं इसकी शिकार ज़्यादा होती हैं.
पूरी दुनिया में किसी भी रिश्ते में रही महिलाओं में से एक तिहाई यौन हिंसा या शारीरिक हिंसा की शिकार होती हैं.
किसी संघर्ष से गुज़र रहे देशों में ऐसी घटनाएं ज़्यादा देखी जाती हैं. जैसे कि कांगो और युगांडा जैसे हिंसक संघर्ष देख रहे देश. अभी भी एशिया, अफ्रीका और ओशियानिया के देशों में घरेलू हिंसा की घटनाएं बहुत होती हैं.
ऐसा नहीं है कि साथी के हाथों हिंसा की घटनाएं केवल विकासशील देशों में होती हों.
डेनमार्क में कुल आबादी की एक तिहाई महिलाएं जीवनसाथी के हाथों हिंसा झेल चुकी हैं.
ब्रिटेन में 30 फ़ीसद के क़रीब महिलाएं कम से कम एक बार अपने पार्टनर के हाथों हिंसा की शिकार हुईं. अमरीका में ये तादाद 32 प्रतिशत है. इनमें से 16 फ़ीसद ने तो यौन हिंसा को भी झेला है.
पार्टनर या जीवनसाथी के हाथों हिंसा की शिकार महिलाओं की सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ता है.
अमरीका में क़रीबी साथी के हाथों हिंसा से बीस लाख से ज़्यादा चोट की घटनाएं होती हैं. यानी ये मोटापे और धूम्रपान से ज़्यादा गंभीर समस्या है.
पीड़ित महिलाओं को भयंकर दर्द, अस्थमा, नींद न आने, पेट ख़राब होने, डायबिटीज़ और यौन संक्रमण की शिकायतें होती देखी गई हैं.
उस महिला के आने की उम्मीद डॉक्टर प्रभात को पहले से थी. हम जिस अस्पताल का ज़िक्र कर रहे हैं, वो नेपाल के पश्चिमी इलाक़े में स्थित घोराही क़स्बे का क्षेत्रीय अस्पताल है.
डॉक्टर प्रभात और उनके साथी डॉक्टरों का साबक़ा हर रात ऐसे मरीज़ों से पड़ता है.
आम तौर पर ऐसे चोटिल मरीज़ शाम ढलने के बाद आते हैं. होता ये है कि इस वक़्त कई शराबी मर्द काम से लौटते हैं और शराब पीना शुरू करते हैं.
फिर वो अपनी बीवियों से मार-पीट करते हैं.
पतियों की हिंसा की शिकार महिलाएं अक्सर अपना पेट दबाए हुए आती हैं. कई बार उन्हें कान में दर्द की भी शिकायत होती है.
लेकिन अस्पताल के डॉक्टर और नर्सें पहले इन महिलाओं के बदन पर चोट और खरोंच के निशान देखते हैं. इन्हीं से असल बात पता चलती है.
घरेलू हिंसा की शिकार महिलाएं
उस महिला को देखते ही डॉक्टर प्रभात रिजाल को लगा कि कुछ गड़बड़ है. उन्होंने महिला से पूछा कि क्या हुआ है? महिला अपने पति की पिटाई से बचने के लिए भागकर अस्पताल आई थी. वो अभी भी हांफ रही थी. उसके बाल पसीने से भीगे हुए थे.
रात के वक़्त अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड काफ़ी व्यस्त रहता है, तो डॉक्टर रिजाल एक नर्स के साथ उस महिला को एक प्राइवेट कमरे में ले गए. उन्होंने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया.
इसके बाद उन्होंने महिला से बात कर के पूरा मामला समझा. उसे समझाया कि पति का मार-पीट करना सामान्य बात नहीं है. उसे ये हरकतें बर्दाश्त करने की ज़रूरत नहीं है.
कुछ देर बाद नर्स उसे पास ही स्थित एकद्वार संकट व्यवस्थापन केंद्र ले गई. ये वो जगह है जहां पर ऐसी घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं की मदद का पूरा इंतज़ाम है.
इन केंद्रों पर एक महिला पुलिस अधिकारी होती है और कुछ सलाहकार होते हैं. जो महिला को मानसिक तनाव और आर्थिक चुनौतियों से उबरने में मदद करते हैं.
पति, लिव-इन पार्टनर या ब्वॉयफ्रैंड के हाथों हिंसा की शिकार होने वाली महिलाओं को सेहत से जुड़ी कई मुश्किलें झेलनी पड़ी हैं. इसकी शुरुआत डॉक्टर के पास जाने से होती है.
कई बार यहां डॉक्टर वो परेशानियां न सिर्फ़ देख पाते हैं बल्कि उनसे निपटने में मदद भी करते हैं, जिनकी शिकार ये महिलाएं होती हैं.
बहुत से देशों में सरकारें अस्पतालों में ऐसी सुविधाएं देने से कतराते हैं. लेकिन, नेपाल ने घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं की मदद के लिए अस्पतालों में ही ऐसे केंद्र बनाए हैं, जो घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं की मदद करते हैं.
इन केंद्रों में ज़्यादातर महिलाओं को ही नियुक्त किया जाता है. जो इन महिलाओं की हर तरह से मदद करते हैं.
कितनी ख़तरनाक है घरेलू हिंसा
यूं तो कोई भी साथी के हाथों हिंसा का शिकार हो सकता है. पर, महिलाएं इसकी शिकार ज़्यादा होती हैं.
पूरी दुनिया में किसी भी रिश्ते में रही महिलाओं में से एक तिहाई यौन हिंसा या शारीरिक हिंसा की शिकार होती हैं.
किसी संघर्ष से गुज़र रहे देशों में ऐसी घटनाएं ज़्यादा देखी जाती हैं. जैसे कि कांगो और युगांडा जैसे हिंसक संघर्ष देख रहे देश. अभी भी एशिया, अफ्रीका और ओशियानिया के देशों में घरेलू हिंसा की घटनाएं बहुत होती हैं.
ऐसा नहीं है कि साथी के हाथों हिंसा की घटनाएं केवल विकासशील देशों में होती हों.
डेनमार्क में कुल आबादी की एक तिहाई महिलाएं जीवनसाथी के हाथों हिंसा झेल चुकी हैं.
ब्रिटेन में 30 फ़ीसद के क़रीब महिलाएं कम से कम एक बार अपने पार्टनर के हाथों हिंसा की शिकार हुईं. अमरीका में ये तादाद 32 प्रतिशत है. इनमें से 16 फ़ीसद ने तो यौन हिंसा को भी झेला है.
पार्टनर या जीवनसाथी के हाथों हिंसा की शिकार महिलाओं की सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ता है.
अमरीका में क़रीबी साथी के हाथों हिंसा से बीस लाख से ज़्यादा चोट की घटनाएं होती हैं. यानी ये मोटापे और धूम्रपान से ज़्यादा गंभीर समस्या है.
पीड़ित महिलाओं को भयंकर दर्द, अस्थमा, नींद न आने, पेट ख़राब होने, डायबिटीज़ और यौन संक्रमण की शिकायतें होती देखी गई हैं.
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